Humanitarian Services
| बाबा दास त्रिलोकी नाथ |
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मुझ दास का जन्म 12 मई 1955 को भार्गव कैम्प जालन्धर में हुआ। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सन् 1976 में मेरी सरकारी नौकरी महालेखाकार, हरियाणा चंड़ीगढ में लग गई। में और मेरी पत्नी दोनों ही धार्मिक विचारों के रहे हैं। पर सत्संगों इत्यादि में कभी जाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। वर्ष 1998 में दास विजय जी के यहाँ सत्संग में जाने पर मुझे महाराज चड़विन्दादास जी के दर्शनों का लाभ प्राप्त हुआ। उनके वचनों के प्रभाव से ऐसी लगन लगी कि, मैं निरंतर सत्संगों में जाने लगा। 17 फरवरी, 2002 को मेरी एक्सीडेंट हो गया तथा मेरे हाथ पैरो की हड्डीयाँ टूट गई, पीड़ा अधिक थी, पर महाराज ने आकर जहाँ पीडा अधिक थी उसे दूर किया। साथ ही साथ मुझे आशीर्वाद व प्रसाद देकर मुझे तीन माह में ही अपने पैरों पर चलने के काबिल कर दिया, जबकि डाक्टर कहते थे की ठीक होने में एक साल लग जाएगा। 26 जनवरी 2005 को अपने घर पर रूहानी सत्संग करवाया तथा उसमें अपने मिशन के ही दो शब्द गाये। महाराज जी ने खुश होकर 16 फरवरी, 06 को लुधियाना समागम में अपना सफेद चोला देकर कीर्तन करने की डयूटी सौंपी जिसे मैंने बखूबी निभाता चला गया और गुरू की रहमतें व आशीर्वाद का खजाना प्राप्त करता रहा। 16 फरवरी 1009 को दास धर्म स्थापना दिवस समागम पर महाराज जी ने हमें बाबा जी की उपाधी से सुशोभित कर दिया। इन सारी रहमतों को प्राप्त कर दास हर रोज परमपिता परमात्मा और अपने सतगुरू का ध्यान करने लगा। वाणी में कबीर साहिब ने सुन्दर शब्दों में कहा है कि ‘‘गुरू कर ले आप समान’’। हुजूर महाराज दर्शन दास जी, महाराज चड़विन्दादास जी के समक्ष अब मेरी यही प्रार्थना अरदास हैं जहाँ भी मेरी सेवा करने की डयूटी लगे मैं भली भांति निभा सकंू और उनका गुणगान कर सकूं। सारी संगत को आनन्दित करते परमात्मा और आत्मा को ब्रह्मलीन कर सकूं |


